Ashok Stambh: अशोक स्तंभ सम्राट अशोक द्वारा स्थापित एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक प्रतीक है। यह स्तंभ बौद्ध धर्म के प्रचार और अहिंसा के संदेश को दर्शाता है। सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ का सिंह शीर्ष भारत का राष्ट्रीय प्रतीक भी है। इसकी उत्कृष्ट शिल्पकला और ऐतिहासिक महत्व इसे एक अनमोल धरोहर बनाते हैं।

अशोक स्तंभ: भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक
अशोक स्तंभ का इतिहास
#अशोक स्तंभ भारत के महान सम्राट अशोक द्वारा बनवाए गए थे।
इन स्तंभों को तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में मौर्य वंश के शासनकाल में स्थापित किया गया था।
सम्राट अशोक और बौद्ध धर्म
सम्राट अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद बौद्ध धर्म को अपनाया और अहिंसा का प्रचार किया।
अशोक स्तंभ उनके बौद्ध धर्म के प्रति समर्पण और धर्म प्रचार के प्रतीक हैं।
स्तंभों की वास्तुकला और डिज़ाइन
अशोक स्तंभ के ऊपरी भाग में सिंह, हाथी, और बैल जैसी आकृतियां होती हैं।
सारनाथ का अशोक स्तंभ, जिसमें चार सिंह दिखते हैं,
भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
अशोक स्तंभ भारतीय संस्कृति और धर्म के अद्भुत उदाहरण हैं।
ये स्तंभ न केवल बौद्ध धर्म का प्रचार करते हैं,
बल्कि शांति, धर्म, और सत्य के आदर्शों को भी दर्शाते हैं।
अशोक स्तंभ पर शिलालेख
स्तंभों पर ब्राह्मी लिपि में कई शिलालेख उत्कीर्ण हैं।
ये शिलालेख सम्राट अशोक के आदेशों और उपदेशों को बताते हैं,
जिनमें नैतिकता और जनकल्याण पर जोर दिया गया है।
प्रमुख अशोक स्तंभ
सारनाथ, लौरिया नंदनगढ़, और दिल्ली के फिरोज शाह कोटला में स्थित अशोक स्तंभ प्रमुख माने जाते हैं।
इन स्तंभों की भव्यता आज भी देखने वालों को आकर्षित करती है।
निष्कर्ष
अशोक स्तंभ भारतीय इतिहास, धर्म और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं।
ये स्तंभ हमें हमारी गौरवशाली धरोहर की याद दिलाते हैं
और शांति, करुणा, तथा नैतिकता के आदर्शों को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देते हैं।