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कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि 4 नवंबर की रात 10:36 बजे शुरू होकर 5 नवंबर की शाम 6:48 बजे समाप्त होगी।

On: October 28, 2025 8:55 AM
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कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि

कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि 4 नवंबर की रात 10:36 बजे शुरू होकर 5 नवंबर की शाम 6:48 बजे समाप्त होगी। यह धार्मिक उच्च महत्व की तिथि है जिसमें विशेष पूजा, स्नान और दान का विधान होता है। जानिए कार्तिक पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त, धार्मिक महत्व और पूजा विधि।

कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि इस दिन की खास पूजा और अनुष्ठान

4 नवंबर की रात 10:36 बजे शुरू होकर 5 नवंबर की शाम 6:48 बजे समाप्त होगी। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से पापों का क्षय होता है और दान-पुण्य का विशेष फल मिलता है। दीपदान करना अत्यंत शुभ माना जाता है, जिसे देव दीपावली के नाम से भी जाना जाता है।

कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि 2025 का विवरण

कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि
#कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि

#कार्तिक पूर्णिमा की तिथि 4 नवंबर को रात 10:36 बजे शुरू होकर 5 नवंबर को शाम 6:48 बजे समाप्त होगी। यह शुभ तिथि हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है और इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।​

कार्तिक पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

इस दिन देव दीपावली मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन देवी-देवता पृथ्वी लोक पर आते हैं, दीपदान करते हैं और गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है। यह पवित्र तिथि आध्यात्मिक शुद्धि और समृद्धि का मार्गदर्शन करती है।​

कार्तिक पूर्णिमा पर पूजा और अनुष्ठान

सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद भगवान सूर्य और मां लक्ष्मी-नारायण की पूजा की जाती है। पूजा के लिए सुबह 7:58 बजे से 9:20 बजे तक का मुहूर्त सर्वोत्तम माना जाता है। दीपक जलाना और दान-पुण्य करना शुभ फलों का कारण होता है।​

गंगा स्नान का समय और महत्व

गंगा स्नान का शुभ मुहूर्त कार्तिक पूर्णिमा के दिन सुबह 4:52 बजे से 5:44 बजे तक होता है। इस स्नान से पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह स्नान भक्तों के लिए आध्यात्मिक शुद्धि का अवसर होता है।​

कार्तिक पूर्णिमा का व्रत और उपाय

इस दिन व्रत रखने से सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। लक्ष्मी पूजा के

दौरान जल, फूल, दीपक अर्पित करें और गणेश मंत्र का निश्चित जाप करें।

इससे आर्थिक और पारिवारिक समृद्धि आती है।​

त्रिपुरारी पूर्णिमा कथा एवं महिमा

पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने इसी दिन त्रिपुरासुर

नामक राक्षस का संहार किया था। इसलिए इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा कहा जाता है।

इससे शिव पूजन की महिमा बढ़ती है और भक्तों को विषम परिस्थितियों से मुक्ति मिलती है।​

कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली पर्व

कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली भी कहा जाता है।

यह पर्व लक्ष्मी पूजन और दीपदान के लिए प्रसिद्ध है।

इस दिन को सिख धर्म में प्रकाश पर्व के तौर पर भी मनाया जाता है।

यह धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।​

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