Nageshwar Jyotirlinga: नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, गुजरात के द्वारका के पास स्थित भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक पवित्र तीर्थस्थल है। यह मंदिर शिव भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और यहाँ विशाल शिव प्रतिमा विशेष आकर्षण का केंद्र है। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की पौराणिक मान्यता है कि यहाँ भगवान शिव ने अपने भक्तों की रक्षा के लिए राक्षस का संहार किया था। यह मंदिर अपनी दिव्य आस्था, भव्यता और आध्यात्मिक शांति के लिए प्रसिद्ध है।

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग: एक दिव्य शिवधाम
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के बारह प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक है।
यह गुजरात के द्वारका के पास स्थित है और इसे प्राचीन शिवधाम के रूप में माना जाता है।
इस मंदिर का उल्लेख शिवपुराण में मिलता है और यह स्थान शिवभक्तों के लिए अत्यंत पवित्र है।
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, दर्शन नामक एक शिवभक्त को दारुक नामक राक्षस ने कैद कर लिया था।
दर्शन ने शिव की घोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और दारुक का वध किया।
इसी स्थान पर शिवलिंग की स्थापना हुई और इसे नागेश्वर ज्योतिर्लिंग कहा जाने लगा।
मंदिर का महत्व
विशाल शिवलिंग: यह शिवलिंग स्वयंभू माना जाता है।
भव्य शिव प्रतिमा: मंदिर परिसर में 80 फीट ऊँची भगवान शिव की प्रतिमा भक्तों को आकर्षित करती है।
श्रावण मास और महाशिवरात्रि: इन दिनों में यहाँ भारी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग कैसे पहुँचे?
स्थान: यह गुजरात के द्वारका शहर से लगभग 17 किमी की दूरी पर स्थित है।
निकटतम रेलवे स्टेशन: द्वारका रेलवे स्टेशन।
निकटतम हवाई अड्डा: जामनगर एयरपोर्ट (137 किमी)।
विशेषता
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग को रक्षा करने वाला ज्योतिर्लिंग कहा जाता है।
मान्यता है कि जो भी श्रद्धा से यहाँ पूजा करता है, उसे सभी प्रकार के भय और बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
निष्कर्ष:
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि एक दिव्य शक्ति स्थल है।
जो भी यहाँ आकर शिव का दर्शन करता है,
उसके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और वह मोक्ष की प्राप्ति करता है। 🌺🔱